किसानों की समस्याओं का करो समाधान या गद्दी छोडो : हुड्डा

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किसानों की समस्याओं का करो समाधान या गद्दी छोडो : हुड्डा

रेवाड़ी:

पूर्व मुख्यमन्त्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने आज रेवाड़ी में आयोजित किसान पंचायत में भाजपा सरकार को खूब लताड़ा। उन्होंने कहा कि गत तीन वर्षों में किसान की जो दुर्गति हुई है, वैसी अंग्रेजों के राज में भी नहीं हुई। स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद कांग्रेस ने किसान को लूट से बचाने के लिए उसकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया। कांग्रेस सरकार के उस कदम से न केवल उत्पादन बढ़ा अपितु किसान की माली हालत में भी काफी सुधार हुआ।

अहीरवाल क्षेत्र में आयोजित किसान पंचायत में उमड़ी भारी भीड़ से उत्साहित हुड्डा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि या तो सरकार किसान की समस्याओं का समाधान करे या गद्दी छोड़े।

उन्होंने आगे कहा कि चुनाव के दौरान किसानों से भाजपा ने यह वायदा किया था कि उनकी सरकार बनते ही स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किसानों को उसकी फसल के लागत मूल्य पर 50 प्रतिशत बढ़ोतरी के हिसाब से फसलों के दाम तय किए जायेंगे। इसके विपरीत आज किसान को अधिकतर फसलों का कांग्रेस शासनकाल में मिले भाव से आधा भी नहीं मिल रहा है।

अहीरवाल की यह धरती किसानों और जवानों की धरती है। न केवल यहां का किसान देश के लोगों का पेट भरने के लिए अनाज पैदा करता है, बल्कि अपने बेटों को देश की सीमाओं की रक्षा करने के लिए फौज में भेजता है।

हुड्डा ने कहा कि इस इलाके में अधिकांश किसान सरसों व बाजरे की खेती करते हैं। मण्डी में इस बार सरसों की जो दुर्गति हुई वो किसी से छुपी हुई नहीं है। आश्चर्य तो इस बात का है कि 15 दिन तक तो सरकार की ओर से कोई ऐजेन्सी खरीद करने भी नहीं आई। मायूस किसान को अपनी सरसों निर्धारित समर्थन मूल्य 3750 रूपये प्रति क्विंटल से प्रति क्विंटल 200 रूपये से लेकर 400 रूपये कम पर बेचनी पड़ी। बाजरे की खरीद के लिए तो इतनी शर्तें लगा दी जितनी सरकारी नौकरियों की भर्ती में भी नहीं लगती। प्रति एकड़ खरीद की सीमा तय कर दी। जबकि सामान्यतया यह सीमा बाजरे की प्रति एकड़ पैदावार से आधी भी नहीं। बाकी के बाजरे को किसान कहां ले जायें, इसका सरकार के पास कोई जवाब नहीं है। ऐसे तुगलकी फैसलों से न केवल किसान को आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि पैदावार भी प्रभावित होती है। पूर्व मुख्यमन्त्री हुड्डा ने सभी किसान संगठनों व किसान हितैषी लोगों को आह्वान किया कि वे एकजुट होकर संघर्ष को आगे बढ़ायें ताकि भाजपा सरकार पर दबाव बनाया जा सके।                                                                                                                                        यहां यह उल्लेखनीय है कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के दस साल के शासनकाल में हर फसल का भरपूर मूल्य मिला व किसानों को भाव तथा बिजली को लेकर कोई बड़ा आन्दोलन देखने में नहीं आया। यही कारण है कि हरियाणा को हर कोणे के किसान में भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की स्वीकार्यता नजर आ रही है।

पंचायत में किसानों से सीधा संवाद करते हुए हुड्डा ने किसानों से पूछा कि क्या कभी उनके शासनकाल में फसलों की ऐसी दुगर्ति हुई थी तो किसानों ने एक स्वर में कहा ‘‘कभी नहीं’’।

इस किसान पंचायत के राजनीतिक मायने निकाले जायें तो कहा जा सकता है कि हुड्डा का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। किसानों से ठसाठस भरी रेवाड़ी अनाज मण्डी में अहीरवाल के अधिकांश दिग्गज हुड्डा के साथ नजर आये। इस दौरान  सांसद दीपेन्द्र हुड्डा,राव धर्मपाल, राव दान सिंह, राव यादवेंद्र, अनीता यादव, पूर्व मंत्री जसवंत बावल, विधायक कुलदीप शर्मा, आनंद सिंह दांगी,गीता भुक्कल, रघुबीर कादयान, जयतीर्थ दहिया, जयवीर बाल्मीकि, उदयभान, शकुन्तला खटक, ललित नागर, पूर्व मंत्री आफ़ताब अहमद, सतपाल सांगवान, पूर्व विधायक अर्जुन सिंह, धर्म सिंह छोक्कर ने भी पंचायत को संबोधित किया । इस अवसर पर पूर्व विधायक सोमबीर सिंह, वेद प्रकाश विद्रोही, प्रो रतिराम, महाबीर यादव, रामवतार, राव अक्षत, कृष्ण राव , राजेन्द्र ठेकेदार, सुनीता सहरावत, खजान सिंह भी मौजूद थे।

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