बेटियां किसी पर बोझ नहीं हैं – राज्यपाल

बेटियां किसी पर बोझ नहीं हैं।

वे जन्म से ही प्रतिभाशाली होती हैं। उनकी प्रतिभा को निखरने का अवसर दिया जाए तो वे कामयाबी के झंडे गाड़ देती हैं। ये उद्गार हरियाणा के राज्यपाल प्रो0 कप्तान सिंह सोलंकी ने शनिवार को राजभवन में ‘बेटी’ गीत का लोकार्पण करने के बाद व्यक्त किए।

‘बेटी बचाओ, बेटी पढाओ, बेटी अपनाओ, बेटी बढाओ’ का संदेश देने वाले इस गीत को समाजसेवी संस्था ‘बिग डे इंडियन हंगर’ ने तैयार किया है। उन्होंने संस्था की संस्थापक शिप्रा गोयल और सह संस्थापक गौरव गोयल के इस प्रसास की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह गीत समाज में बेटियों के प्रति सोच को बदलने में महत्वपूर्ण कड़ी सिद्ध होगा।

राज्यपाल ने कहा कि बेटियों व महिलाओं के प्रति अपराध और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए पूरे समाज को आगे आना होगा। उन्होंने ने चिंता व्यक्त की कि कई राज्यों में लिंगानुपात चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 में की गई जनगणना के अनुसार देश में प्रति 1000 लड़कों के अनुपात में 927 लडकियां थीं। यह आँकड़ा 2011 में और गिरकर 919 हो गया। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या प्रकृति और परमात्मा के विरूद्ध किया गया जघन्य अपराध है। यदि इसे रोका नहीं गया तो वह दिन दूर नहीं जब मानव स्वयं ही अपना विनाश कर लेगा।

उन्होंने कहा कि बेटियों साथ होने वाले भेदभाव को मिटाने के लिए ही प्रधानमंत्री ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढाओ’ अभियान की शुरूआत की थी। आज इस संदेश को लेकर सरकार के साथ-साथ विभिन्न संस्थाएं जो काम कर रही हैं उससे यह संदेश पूरे देश में गूंज रहा है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘बिग डे इंडियन हंगर’ जैसी संस्थाओं की ओर से किए जा रहे सराहनीय प्रयासों के माध्यम से हम देश की बेटियों के अस्तित्व को सुरक्षित और भविष्य को उज्ज्वल करने में सफल रहेंगे। बेटियों की उपलब्धियों पर गर्व प्रकट करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज देश की बेटियों ने हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि महान अंतरिक्ष वैज्ञानिक कल्पना चावला का नाम आते ही आज हर भारतीय का सीना चैड़ा हो जाता है। गीता फोगाट और बबीता फोगाट की उपलब्धियों पर तो दंगल फिल्म ही बन चुकी है। रियो ओलम्पिक में पी0 वी0 सिंधु और साक्षी मलिक ने तथा पैरालम्पिक में दीपा मलिक ने पदक जीतकर देश की शान बढाई। इसी प्रकार विभिन्न परीक्षा परिणामों में बेटियां हर बार अव्वल रहती हैं।

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