INLD leader Abhay Chautala demands Crop Compensation for farmers

चंडीगढ़

सिरसा में ऐलनाबाद हलके के धन्यवाद दौरे के दौरान इनेलो नेता चौधरी अभय सिंह चौटाला को ग्रामीण आंचल में किसानों ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मिलने वाली मुआवजे की राशि और बारिश, ओलों से सरसों, जौं, गेहूं आदि की फसल खराब होने के कारण स्पेशल गिरदावरी करवाने के लिए किसान राजनेताओं और अधिकारियों के बार-बार चक्कर लगा रहे हैं परंतु इसके बावजूद भी सत्ताधारी राजनेता आंखें मूंदें बैठे हैं।
इनेलो नेता ने बताया कि 12-13 दिसम्बर को बारिश और ओलों की वजह से रोहतक, भिवानी, सिरसा, फतेहाबाद, चरखीदादरी आदि जिलों में फसलों का नुकसान हुआ है। किसानों द्वारा सरकार को बार-बार चेताने के बावजूद भी राजस्व अधिकारियों ने अभी तक स्पेशल गिरदावरी नहीं करवाई है जिसकी वजह से किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नुकसान का मुआवजा मिलना मुश्किल है। इसी तरह 2016-17 और 2018-19 में जो फसलों का प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान हुआ था उसका मुआवजा देना भी अभी बाकी है जबकि 2016 में खरीफ फसल के लिए लगभग 257 करोड़ रुपए प्रीमियम बीमा कंपनियों को दिया और 2017 में बीमा कंपनियों को रबी फसल का लगभग 108 करोड़ और खरीफ का लगभग 300 करोड़ रुपए प्रीमियम की अदायगी की गई। कानून के अनुसार जो फसल के नुकसान का मुआवजा देय बनता है उसकी अदायगी दो महीने के अंदर-अंदर करनी चाहिए परंतु हरियाणा के लगभग 7 हजार किसानों के मुआवजे की राशि की अदायगी अभी तक बाकी है जिसके बारे में बीमा कंपनियां आंखें मूंदें बैठी हैं।
इनेलो नेता ने बताया कि यह किसान व कमेरे की बदकिस्मती है कि न ही तो उनको स्वामीनाथन रिपोर्ट के अनुसार फसल के दाम मिलते हैं और न ही जो प्राकृतिक आपदाओं से फसलों का नुकसान होता है उसके मुआवजे की राशि मिलती है। यह विडंबना है कि केवलमात्र किसान ही है जिसकी वस्तु की कीमत लेने वाला लगाता है जबकि बाजार में जाएं तो वस्तु की कीमत बेचने वाला लगाता है। अगर फसल का नुकसान हो जाए तो सरकारी अधिकारी मुल्यांकन करने के लिए जानबूझकर देरी करते हैं क्योंकि फसल बीमा योजना के नियमानुसार अगर फसल खराब होने के दो हफ्ते के अंदर-अंदर उसका जायजा नहीं लिया जाता तो उसके बाद मुआवजे की राशि का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता जिसकी वजह से किसान मुआवजे से वंचित हो जाता है।
इनेलो नेता ने बताया कि इसके अलावा किसान से जो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रीमियम है वह उसकी मर्जी के बगैर पूछे उसके खाते से काटकर बीमा कंपनी को दे दिया जाता है। बेशक किसान के गन्ने की कीमत निर्धारण का मामला हो, बकाया राशि की अदायगी का मामला हो, मंडी में धान, गेहूं, सरसों, कपास आदि के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने की बात हो तो ऐसे में किसान का कोई भी हिमायती नहीं है। परंतु गठबंधन सरकार के सहयोगी अपने भत्ते तो पहली कलम से बढ़ाना नहीं चूके और किसानों  की प्राकृतिक आपदा से खराब हुई फसलों की स्पेशल गिरदावरी करवाने और 2016-17 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बकाया राशि की अदायगी करवाने बारे में सोचने का समय नहीं है।

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Rajesh

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